प्रिज्म से संबंधित प्रश्न एवं उनके उत्तर

1. प्रिज्म क्या है?

उत्तर: प्रिज्म कांच या किसी अन्य पारदर्शी माध्यम का एक ठोस टुकड़ा होता है, जिसकी कम से कम दो समतल सतहें (फलक) एक-दूसरे से एक निश्चित कोण पर झुकी होती हैं। इन सतहों के बीच के कोण को 'प्रिज्म कोण' (Angle of prism) कहा जाता है। प्रिज्म का उपयोग प्रकाश के अपवर्तन और विशेष रूप से श्वेत प्रकाश के वर्ण विक्षेपण के अध्ययन के लिए किया जाता है।

2 प्रिज्म से गुजरने पर श्वेत प्रकाश के साथ क्या होता है?

उत्तर: जब श्वेत प्रकाश एक प्रिज्म से गुजरता है, तो यह अपने घटक रंगों में विभाजित हो जाता है, जिसे वर्ण विक्षेपण कहते हैं। प्रत्येक रंग की तरंगदैर्ध्य अलग होने के कारण वे अलग-अलग कोणों पर मुड़ते हैं।
 
3. 'स्पेक्ट्रम' क्या है?
उत्तर: प्रिज्म से गुजरने पर श्वेत प्रकाश के विक्षेपण से प्राप्त सात रंगों के समूह को स्पेक्ट्रम कहते हैं। यह रंगों का एक सतत बैंड होता है (जैसे इंद्रधनुष)
 
4. प्रकाश का प्रकीर्णन और अपवर्तन में क्या अंतर है?
उत्तर: प्रकीर्णन तब होता है जब प्रकाश कणों (जैसे वायुमंडलीय अणु) से टकराकर चारों दिशाओं में बिखर जाता है, जबकि अपवर्तन तब होता है जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाते समय मुड़ जाता है।
5. प्रिज्म सूत्र क्या है? 
उत्तर: प्रिज्म सूत्र है:
  • μ=sin(A+δm/2)sin(A/2)mu equals the fraction with numerator s i n open paren cap A plus delta sub m / 2 close paren and denominator s i n open paren cap A / 2 close paren end-fraction
    जहाँ
    μmu
    प्रिज्म का अपवर्तनांक है,
    Acap A
    प्रिज्म का कोण है, और
    δmdelta sub m
    न्यूनतम विचलन कोण है 
 6. प्रिज्म द्वारा सबसे कम विचलित होने वाली किरण कौन सी है?
उत्तर: लाल रंग की किरण सबसे कम विचलित होती है, जबकि बैंगनी रंग की किरण सबसे अधिक विचलित होती है
 
7. प्रिज्म के मुख्य कार्य क्या हैं?
उत्तर: प्रिज्म के मुख्य कार्य हैं:
  • श्वेत प्रकाश को उसके घटक रंगों में विभाजित करना (वर्ण विक्षेपण)।
  • प्रकाश को परावर्तित या अपवर्तित करना।
  • विभिन्न ध्रुवीकरण वाले घटकों में प्रकाश को विभाजित करना
 प्रश्न 8: प्रिज्म से प्रकाश का अपवर्तन किस प्रकार होता है? 
उत्तर: जब प्रकाश की किरण एक माध्यम (हवा) से प्रिज्म के पहले फलक से टकराकर दूसरे माध्यम (कांच) में प्रवेश करती है, तो वह अभिलंब की ओर मुड़ जाती है (अपवर्तन)। फिर जब यह कांच से हवा में बाहर निकलती है, तो अभिलंब से दूर हट जाती है। इस प्रक्रिया में, प्रकाश किरण अपने मूल पथ से विचलित हो जाती है। आपतित किरण और निर्गत किरण के बीच के कोण को 'विचलन कोण' (Angle of deviation) कहते हैं।
 
 प्रश्न 9: श्वेत प्रकाश के वर्ण विक्षेपण (Dispersion) से आप क्या समझते हैं? 
उत्तर: जब श्वेत प्रकाश की एक किरण प्रिज्म से होकर गुजरती है, तो वह अपने सात घटक रंगों (बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल - VIBGYOR) में विभाजित हो जाती है। इस घटना को 'प्रकाश का वर्ण विक्षेपण' कहते हैं
 
प्रश्न 10: श्वेत प्रकाश प्रिज्म द्वारा क्यों विक्षेपित होता है? 
उत्तर: श्वेत प्रकाश काँच के अंदर विभिन्न रंगों का मिश्रण होता है। काँच के माध्यम में, विभिन्न रंगों के प्रकाश की चाल और तरंगदैर्ध्य अलग-अलग होती है, जिसके कारण काँच का अपवर्तनांक (refractive index) भी प्रत्येक रंग के लिए थोड़ा भिन्न होता है। जब प्रकाश प्रिज्म से गुजरता है, तो प्रत्येक रंग अलग-अलग कोणों पर मुड़ता है (सबसे अधिक विचलन बैंगनी रंग का और सबसे कम विचलन लाल रंग का होता है), जिससे वे अलग-अलग दिखाई देते हैं।
 
प्रश्न 11: न्यूनतम विचलन कोण क्या होता है?
उत्तर: जब प्रकाश की किरण प्रिज्म से इस प्रकार अपवर्तित होती है कि आपतन कोण (angle of incidence, i) और निर्गत कोण (angle of emergence, e) बराबर होते हैं (i = e), तो विचलन कोण (angle of deviation, δ) का मान न्यूनतम होता है। इस कोण को 'न्यूनतम विचलन कोण' (Angle of minimum deviation,
δmdelta sub m
) कहते हैं
 
इंद्रधनुष बनने की प्रक्रिया
इंद्रधनुष बनने के लिए आवश्यक मुख्य चरण और भौतिक घटनाएँ नीचे दी गई हैं:
  1. प्रकाश का अपवर्तन और विक्षेपण: जब सूर्य का श्वेत प्रकाश (जो सात रंगों से बना होता है) बारिश की एक छोटी गोलाकार बूँद में प्रवेश करता है, तो हवा से सघन माध्यम (पानी) में जाने के कारण इसका अपवर्तन होता है और यह थोड़ा मुड़ जाता है। इसी बिंदु पर, श्वेत प्रकाश अपने सात घटक रंगों (VIBGYOR - बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल) में विभाजित हो जाता है, क्योंकि हर रंग के लिए पानी का अपवर्तनांक थोड़ा अलग होता है। इस घटना को वर्ण विक्षेपण कहते हैं। 
  2. आंतरिक परावर्तन:  पानी की बूँद के भीतर, विभाजित रंग की किरणें बूँद की पिछली सतह से टकराती हैं। यदि ये किरणें एक निश्चित क्रांतिक कोण से अधिक कोण पर टकराती हैं, तो ये बूँद के अंदर ही परावर्तित हो जाती हैं। इस घटना को पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं।

     
  3. पुनः अपवर्तन और बाहर निकलना: आंतरिक परावर्तन के बाद, प्रकाश की किरणें बूँद की सामने वाली सतह से बाहर निकलती हैं। यहाँ फिर से अपवर्तन होता है (पानी से हवा में जाने पर), और प्रकाश एक निश्चित कोण पर दर्शक की आँखों तक पहुँचता है
 
 
 

 

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